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150 से ज्यादा नोटिस, हजारों उत्पाद जब्त—कंपनियों ने कहां तोड़े खाद्य सुरक्षा के नियम?

 

नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य और पेय कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 22 अगस्त को प्राधिकरण ने बताया कि हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं। कार्रवाई का आधार मुख्य रूप से भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे और लेबलिंग नियमों का पालन न करना रहा।



जिन बड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया गया है, उनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डेनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, डियाजियो, पर्नोड रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू शामिल हैं।


मामला केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण ने ऐसे उत्पादों पर भी कार्रवाई की है, जिनमें गलत या भ्रामक दावे, अनुचित लेबलिंग, उत्पाद की प्रकृति को लेकर भ्रम पैदा करने वाली जानकारी और नियमों के अनुरूप न होने वाले दावे पाए गए। ऊर्जा पेय के मामले में भी एफएसएसएआई ने कई कंपनियों को नोटिस दिया था। जुलाई में छह कंपनियों के उत्पादों पर कार्रवाई की गई थी, जिनमें रेड बुल, पेप्सिको, कैंपा, स्टिंग, हेल और मॉन्स्टर शामिल थे।


यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के लिए बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—अगर पैकेट पर लिखी जानकारी ही भ्रमित करने वाली हो तो ग्राहक सही फैसला कैसे ले? खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापन में किए गए दावों की जिम्मेदारी कंपनियों की है। एफएसएसएआई की मौजूदा कार्रवाई से साफ है कि नियामक अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि उसके प्रचार और लेबल पर लिखी हर महत्वपूर्ण जानकारी की भी जांच कर रहा है।


हालांकि, किसी कंपनी को नोटिस मिलना अपने आप में अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। आगे की जांच और नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही उल्लंघन की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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