नई दिल्ली। देश में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने बुधवार, 1 जुलाई से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। इसके साथ ही लगभग दो दशक से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह नई व्यवस्था प्रभावी हो गई है।
नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी, जबकि मनरेगा में यह सीमा 100 दिन थी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संशोधित मजदूरी दरें भी अधिसूचित कर दी हैं। नई व्यवस्था में न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी तथा राष्ट्रीय औसत मजदूरी बढ़ाकर लगभग 327 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका सशक्तीकरण, कौशल विकास और डिजिटल निगरानी के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।

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