प्रणव बजाज
उज्जैन के कथित जमीन घोटाले को लेकर अब मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। लंबे समय तक चुप्पी साधने के आरोप झेल रही कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान करते हुए 15 जुलाई को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि उज्जैन में सरकारी और धार्मिक महत्व की जमीनों के आवंटन एवं उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन मुद्दों पर विपक्ष लंबे समय तक मुखर नहीं दिखा, उन पर अब अचानक आक्रामक रुख क्यों अपनाया जा रहा है। प्रदेश में पिछले कुछ समय से जमीन, खनन, ट्रांसफर, शराब और अन्य मामलों में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस अब इन्हीं मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित न रखकर दस्तावेज़ों, तथ्यों और जवाबदेही की मांग के साथ आगे बढ़ाती है, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए खारिज कर रही है।
अब निगाहें 15 जुलाई पर टिकी हैं। यह आंदोलन केवल उज्जैन जमीन विवाद तक सीमित रहेगा या प्रदेश में भ्रष्टाचार के अन्य आरोपों को भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है, या फिर उपचुनाव और चुनावी राजनीति से पहले विपक्ष की सक्रियता का नया अध्याय?

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