ईरान-इजराइल तनाव के बाद पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच दुबई का रियल एस्टेट बाजार नए दौर में प्रवेश कर रहा है। संपत्तियों की कीमतों में तेजी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ने के साथ ही भारतीय निवेशकों ने खरीदारी बढ़ा दी है। बेहतर रिटर्न, कर (टैक्स) संबंधी सुविधाएं और गोल्डन वीजा जैसी योजनाओं ने दुबई को भारतीयों के लिए सबसे पसंदीदा विदेशी निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय अब दुबई में सबसे बड़े विदेशी प्रॉपर्टी खरीदार बन चुके हैं। लग्जरी अपार्टमेंट से लेकर व्यावसायिक संपत्तियों तक भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सुरक्षित निवेश माहौल, मजबूत बुनियादी ढांचा, विश्वस्तरीय सुविधाएं और कारोबार के अनुकूल नीतियां भी इस रुझान को गति दे रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुद को अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर निवेश केंद्र के रूप में स्थापित किया है। इसी वजह से भारत के उद्योगपति, कारोबारी, स्टार्टअप उद्यमी और उच्च आय वर्ग के निवेशक दुबई में संपत्ति खरीदने को दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि यूएई की निवेश-अनुकूल नीतियां और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में भारतीय निवेश और अधिक बढ़ सकता है। इससे न केवल दुबई के रियल एस्टेट बाजार को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारत और यूएई के बीच व्यापारिक एवं आर्थिक संबंध भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचने की संभावना है।

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