महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की प्रस्तावित भूख हड़ताल से ठीक पहले सूचना का अधिकार (RTI) नियमों में किए गए विवादित बदलावों पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले को पारदर्शिता और जनदबाव की बड़ी जीत माना जा रहा है।
दरअसल, राज्य सरकार ने हाल ही में RTI नियमों में कुछ संशोधन किए थे, जिन पर नागरिक संगठनों और पारदर्शिता के पक्षधर कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी। अन्ना हजारे ने आरोप लगाया था कि नए नियम सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं, आम नागरिकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डालते हैं और अपील की व्यवस्था को कमजोर करते हैं। उनका कहना था कि इससे सरकारी जवाबदेही प्रभावित होगी और सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना को नुकसान पहुंचेगा।
हजारे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इतने महत्वपूर्ण बदलाव जनता, सामाजिक संगठनों और RTI कार्यकर्ताओं से कोई व्यापक चर्चा किए बिना लागू कर दिए। उन्होंने मांग की थी कि विवादित नियमों को तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
अन्ना हजारे के आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार ने विवाद बढ़ने से पहले नियमों के अमल पर रोक लगाने का निर्णय लिया। अब सरकार इन संशोधनों की दोबारा समीक्षा करेगी और सभी पक्षों से चर्चा के बाद आगे का फैसला लेगी।
गौरतलब है कि सूचना का अधिकार अधिनियम को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रभावी हथियार माना जाता है। ऐसे में RTI नियमों में किसी भी बदलाव को लेकर सरकारों को अक्सर नागरिक समाज और पारदर्शिता समर्थकों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ता है।

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