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नई दिल्ली। भारत वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग उद्योग में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। अगले एक दशक में देश करीब 16,000 जहाजों की रीसाइक्लिंग का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए 8 अरब डॉलर (करीब ₹76,000 करोड़) की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ व्यापक योजना तैयार की गई है।
इस महत्वाकांक्षी पहल का उद्देश्य भारत को दुनिया के प्रमुख ग्रीन शिप रीसाइक्लिंग हब के रूप में स्थापित करना और वैश्विक सर्कुलर इकोनॉमी में देश की भूमिका को और मजबूत बनाना है।
जानकारी के अनुसार, भारत के 30 से अधिक शिप रीसाइक्लिंग यार्ड (EU) से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं। इनमें से कई यार्ड पर्यावरण, श्रमिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक नियमों का पालन करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय यार्डों को यूरोपीय संघ की मान्यता मिलती है, तो देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक जहाज रीसाइक्लिंग के ऑर्डर मिल सकते हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, इस्पात और अन्य धातुओं की पुनर्प्राप्ति बढ़ेगी तथा पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
हाल के वर्षों में भारत में जहाज रीसाइक्लिंग गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर सरकार और उद्योग जगत आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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