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उद्घाटन के 2 महीने बाद ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पड़े गड्ढे; कांग्रेस ने कहा- 'जनता के लिए घातक है मोदी सरकार'

 

नई दिल्ली: हाल ही में आम जनता के लिए खोले गए ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मॉनसून की पहली बारिश के बाद ही एक्सप्रेसवे पर कई जगह गहरे गड्ढे होने और सड़क धंसने की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इस मुद्दे को लपकते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार और खराब निर्माण का आरोप लगाते हुए चौतरफा हमला बोला है।


 क्या है पूरा मामला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिल्ली से देहरादून की दूरी को महज 2 से ढाई घंटे में समेटने वाले इस महत्वकांक्षी एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इसके शुरू होने के दो महीने के भीतर ही सोशल मीडिया पर यात्रियों द्वारा शेयर किए जा रहे वीडियो में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे साफ देखे जा सकते हैं।

यात्रियों का आरोप है कि एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से दौड़ती गाड़ियां इन गड्ढों के कारण अपना संतुलन खो रही हैं। कई चालकों ने शिकायत की है कि अचानक सामने आए गड्ढे की वजह से उनकी गाड़ियों के अलॉय व्हील तक टेढ़े हो गए हैं और यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है

कांग्रेस का तीखा पलटवार

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की 'स्पीड और स्केल' की नीति पर तंज कसते हुए इसे भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बताया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं और सोशल मीडिया हैंडल से बयान जारी कर कहा गया:

> "₹12,000 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुए अभी ठीक से दो महीने भी नहीं बीते कि यह 'एक्सीडेंट जोन' में तब्दील हो गया है। पहली ही बारिश में एक्सप्रेसवे की सड़कें उखड़ गईं और बड़े-बड़े गड्ढे नजर आने लगे हैं। मोदी सरकार का यह मॉडल देश और जनता की जेब व जान दोनों के लिए घातक साबित हो रहा है।"

कांग्रेस ने मांग की है कि इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और इसकी उच्च स्तरीय जांच हो कि जनता के पैसे का इस कदर दुरुपयोग क्यों किया गया।

###NHAI और प्रशासन की स्थिति

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और विपक्ष के हमलों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) हरकत में आया है। प्रभावित हिस्सों पर आनन-फानन में मिट्टी और गिट्टी डालकर गड्ढों को अस्थाई रूप से भरने (पैचवर्क) का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि, तकनीकी जानकारों का कहना है कि इतने आधुनिक और महंगे एक्सप्रेसवे का दो महीने में इस तरह बैठ जाना सीधे तौर पर निर्माण की गुणवत्ता और कंक्रीट मिक्सिंग में बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।

इस रूट पर सफर करने वाले यात्री अब डरे हुए हैं, क्योंकि 100 किमी/घंटे की रफ्तार वाले इस एक्सप्रेसवे पर जरा सी चूक या छोटा सा गड्ढा भी जानलेवा साबित हो सकता है।

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