भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। पार्टी के कई नेताओं ने उनके हालिया बयानों और संगठनात्मक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी, से हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और निधि चतुर्वेदी सहित कुछ अन्य नेताओं के रुख ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी अब दबे स्वर में नहीं, बल्कि खुलकर सामने आ रही है। इससे पहले प्रवीण कक्कड़ और आरिफ मसूद के नाम भी इस राजनीतिक खींचतान में चर्चा में रहे हैं। हालांकि, संबंधित नेताओं के बयानों और मांगों पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक अनुशासनात्मक निर्णय सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं। उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह राज्यसभा का अगला कार्यकाल नहीं चाहेंगे और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
कांग्रेस आलाकमान की नजर अब मध्यप्रदेश की इन गतिविधियों पर है। यदि असंतोष बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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