अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान पर अमेरिका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वेंस ने हाल के कूटनीतिक प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की थी, जिसके बाद कई अमेरिकी सांसदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
आलोचक सांसदों का कहना है कि पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा इतिहास लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है और ऐसे देश की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उचित नहीं है। कुछ नेताओं ने याद दिलाया कि अमेरिका स्वयं अतीत में पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय आतंकी नेटवर्कों को लेकर चिंता जताता रहा है।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब वेंस ने अमेरिका-ईरान वार्ता के संदर्भ में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका का उल्लेख किया। इसके बाद विपक्षी नेताओं और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने सवाल उठाए कि क्या वॉशिंगटन पाकिस्तान को लेकर अपने पुराने रुख से पीछे हट रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि वेंस ने हाल ही में पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर भी टिप्पणी की थी और कहा था कि वहां मीडिया की आजादी को लेकर गंभीर सवाल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति और आतंकवाद के मुद्दे पर उसके दोहरे मानकों को लेकर भी नई बहस छेड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति में और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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