यरुशलम। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना तब तक तैनात रहेगी, जब तक देश की सुरक्षा के लिए इसकी आवश्यकता होगी। उनके इस बयान को क्षेत्र में जारी सुरक्षा चुनौतियों और ईरान समर्थित समूहों को लेकर इजराइल की सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है।
नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के साथ समन्वय के जरिए इजराइल ने ईरान के परमाणु ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। हालांकि इस दावे पर ईरान की ओर से अलग रुख सामने आता रहा है।
इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति का फैसला इसी आधार पर लिया जाएगा। दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की मौजूदगी को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों के बावजूद इजराइल अपनी सुरक्षा नीति में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की राजनीतिक और सामरिक स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। नेतन्याहू के ताजा बयान ने क्षेत्रीय तनाव और भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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