लखनऊ/अयोध्या। श्रीराम मंदिर के चढ़ावे और चंदा प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath का 19 जून को प्रस्तावित अयोध्या दौरा राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में रामलला के दर्शन-पूजन और मंदिर परिसर का निरीक्षण शामिल बताया जा रहा है।
इस बीच सबसे अधिक चर्चा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम के दौरान चंपत राय को प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न रहने और उनकी ओर से किसी अन्य प्रतिनिधि को नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि न तो राज्य सरकार और न ही ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने हाल ही में चंपत राय से पूछताछ की और संबंधित दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने वाला भी हो सकता है। अयोध्या भाजपा और हिंदुत्व की राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक केंद्र माना जाता है। ऐसे में विवाद के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी को सरकार की सक्रियता और निगरानी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चंपत राय की संभावित अनुपस्थिति सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है। लेकिन इस घटनाक्रम ने मंदिर ट्रस्ट, सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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