नियमित और लंबे समय तक उच्च तीव्रता वाला व्यायाम करने वाले लोगों, खासकर पेशेवर खिलाड़ियों और एंड्योरेंस एथलीट्स में कभी-कभी दिल की बनावट और कार्यप्रणाली में कुछ प्राकृतिक बदलाव देखने को मिलते हैं। इसी स्थिति को एथलेटिक हार्ट सिंड्रोम (Athlete's Heart Syndrome) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सामान्यतः कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर का व्यायाम के प्रति अनुकूलन (Adaptation) होता है।
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि लगातार कड़ी ट्रेनिंग के कारण हृदय की मांसपेशियां मजबूत हो सकती हैं और दिल के कुछ हिस्सों का आकार थोड़ा बढ़ सकता है। इससे हर धड़कन के साथ अधिक मात्रा में रक्त पंप होता है, इसलिए कई एथलीट्स की आराम की स्थिति में हृदय गति (Resting Heart Rate) सामान्य लोगों की तुलना में कम होती है।
हालांकि, एथलेटिक हार्ट सिंड्रोम और हृदय की गंभीर बीमारियों के लक्षण कभी-कभी एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए यदि व्यायाम के दौरान सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, बेहोशी, अनियमित धड़कन या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography), कार्डियक एमआरआई या स्ट्रेस टेस्ट जैसी जांचों की जरूरत पड़ सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बदलाव सामान्य प्रशिक्षण के कारण हैं या किसी हृदय रोग का संकेत।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि जो लोग मैराथन, साइक्लिंग, तैराकी, जिम या अन्य हाई-इंटेंसिटी खेलों में नियमित रूप से भाग लेते हैं, उन्हें समय-समय पर स्वास्थ्य और हृदय की जांच करानी चाहिए। यदि परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या अचानक कार्डियक डेथ का इतिहास रहा हो, तो स्क्रीनिंग और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही प्रशिक्षण, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और नियमित मेडिकल चेकअप के साथ अधिकांश एथलीट सुरक्षित रूप से खेल गतिविधियां जारी रख सकते हैं।

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