स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही साढ़े 3 साल की मासूम बच्ची के इलाज को लेकर एक बार फिर न्यायालय में संवेदनशील सवाल उठा है। मामला Spinal Muscular Atrophy से पीड़ित बच्ची के उस इंजेक्शन से जुड़ा है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सुनवाई के दौरान Madhya Pradesh High Court में यह सवाल चर्चा में रहा कि क्या इस तरह की गंभीर स्थिति में राज्य और समाज की जिम्मेदारी सिर्फ नारों और योजनाओं तक सीमित रहनी चाहिए। अदालत ने भावनात्मक टिप्पणी करते हुए यह भी पूछा कि क्या यह स्थिति ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाओं की वास्तविक भावना को दर्शाती है, जहां हर जरूरतमंद बच्ची तक मदद पहुंचनी चाहिए।
परिजनों ने बताया कि अब तक उन्होंने समाज, दानदाताओं और ऑनलाइन फंडिंग के जरिए करीब साढ़े 7 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं, लेकिन इलाज के लिए अभी भी बड़ी राशि की जरूरत है। परिवार लगातार आर्थिक मदद की अपील कर रहा है।
यह मामला न केवल चिकित्सा लागत की चुनौती को उजागर करता है, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज में सरकारी सहायता और स्वास्थ्य नीति पर भी सवाल खड़े करता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तय करते हुए मदद की संभावनाओं पर विचार जारी रखा है।
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