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प्यासे बाघों का बढ़ता खतरा: जल स्रोत सूखे तो जंगल छोड़ आबादी में पहुंच रहे वनराज, 5 साल में 380 मौतेंThe growing threat of thirsty tigers: As water sources dry up, tigers are abandoning forests and entering populated areas, resulting in 380 deaths in five years.



भोपाल। मध्य प्रदेश में जल स्रोतों के सूखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने से बाघों के हमलों की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। पिछले पांच वर्षों में राज्य में बाघों के हमलों में 380 लोगों की मौत दर्ज की गई है। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि गर्मी के मौसम में जंगलों के भीतर पानी की कमी होने पर बाघ और अन्य वन्यजीव भोजन एवं पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।


विशेषज्ञों के अनुसार, कई वन क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों का स्तर लगातार घट रहा है। इसका असर वन्यजीवों के व्यवहार पर पड़ रहा है। पानी और शिकार की तलाश में बाघ गांवों और खेतों के नजदीक पहुंच रहे हैं, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ रहा है।


Madhya Pradesh देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य माना जाता है। वन विभाग कृत्रिम जल स्रोत विकसित करने, जलाशयों का संरक्षण करने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठा रहा है। इसके बावजूद कई इलाकों में खतरा बना हुआ है।


वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में जल संरक्षण, आवास प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष अब वन संरक्षण और जनसुरक्षा दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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