भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता के नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, लेकिन कई जिलों में यह कार्यक्रम अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी संगठन ने सख्त रुख अपनाते हुए एनएसयूआई पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिला इकाइयों और छात्र संगठन एनएसयूआई को विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए थे। हालांकि 21 जिलों में प्रदर्शन या तो नहीं हुए या फिर बेहद कमजोर रहे। इससे संगठन के भीतर समन्वय और अनुशासन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जब प्रदेश स्तर पर कोई आंदोलन घोषित किया जाता है तो सभी अनुषांगिक संगठनों और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे उसे सफल बनाएं। प्रदर्शन में अपेक्षित भागीदारी नहीं मिलने को संगठनात्मक निर्देशों की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है।
इसी के चलते कांग्रेस ने संबंधित जिलों के एनएसयूआई पदाधिकारियों और जिम्मेदार कार्यकर्ताओं से जवाब तलब किया है। नोटिस में पूछा गया है कि निर्देशों के बावजूद प्रदर्शन क्यों नहीं हुए और संगठनात्मक कार्यक्रमों के प्रति उदासीनता क्यों दिखाई गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा भी बन गया है। आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई या गुटबाजी को लेकर सख्त संदेश देना चाहता है।
वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि कई जिलों में स्थानीय कारणों और संगठनात्मक व्यस्तताओं की वजह से कार्यक्रम पूरी तरह सफल नहीं हो सके। हालांकि अंतिम निर्णय नोटिस के जवाब मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन, संगठनात्मक सक्रियता और नेतृत्व की पकड़ को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोटिस प्राप्त पदाधिकारी क्या जवाब देते हैं और पार्टी नेतृत्व आगे क्या कार्रवाई करता है।

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