इंदौर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत इंदौर में करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए आधुनिक आरओ (RO) जल वितरण केंद्रों का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित स्मार्ट सिटी कंपनी से जवाब तलब किया है।
मामला उन आधुनिक प्याऊ और आरओ मशीनों से जुड़ा है, जिन्हें शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कुछ वर्ष पहले स्थापित किया गया था। जानकारी के अनुसार, इस परियोजना पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके साथ ही संबंधित कंपनी को अगले दस वर्षों तक मशीनों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन मशीनों को सार्वजनिक उपयोग के लिए लगाया गया था, उनमें से कई या तो बंद पड़ी हैं, खराब हो चुकी हैं या फिर मौके से गायब हैं। इससे न केवल योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित की गई मशीनों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने स्मार्ट सिटी कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
मामले ने शहर में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों का कहना है कि यदि सार्वजनिक सुविधाएं कुछ ही वर्षों में निष्प्रभावी हो जाएं तो यह योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब अदालत के समक्ष कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित आरओ मशीनों की स्थिति क्या है, उनका रखरखाव कैसे किया गया और यदि वे बंद या गायब हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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