लेखक: सीए तेजेश सुतरिया
देश की कर व्यवस्था में लंबे समय बाद बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू करने जा रही है, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले ही पुराने कानून को “संशोधनों की भूलभुलैया” बता चुकी हैं, जिसमें समय के साथ 4000 से अधिक बदलाव जुड़ चुके थे। ऐसे में नया कानून टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नया अधिनियम 536 धाराओं में व्यवस्थित किया गया है, जिससे यह पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और समझने योग्य बन गया है। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—कम जटिलता, आसान अनुपालन और कम विवा
निम्न नए बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं—
1. एक “कर वर्ष” से खत्म होगा पुराना भ्रम अब तक लागू वित्त वर्ष और निर्धारण वर्ष की व्यवस्था को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। नए कानून के तहत केवल एक कर वर्ष (Tax Year) की अवधारणा लागू की जाएगी, जिसके आधार पर आय और कर का निर्धारण किया जाएगा। इससे करदाताओं के लिए प्रक्रिया और अधिक सरल एवं स्पष्ट होने की उम्मीद है।
2. नए टैक्स स्लैब: मध्यम वर्ग को राहत
नए कानून के तहत टैक्स स्लैब को सरल बनाने का प्रयास किया गया है। वर्तमान नई कर व्यवस्था (डिफॉल्ट कर व्यवस्था) के अनुरूप आय पर क्रमशः 5% से 30% तक की दरें लागू होती हैं, जबकि ₹4 लाख तक की आय को कर मुक्त रखने का प्रावधान प्रस्तावित ढांचे में देखा जा रहा है।
नई कर व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट) के संभावित स्लैब इस प्रकार हैं—
₹0 से ₹4 लाख तक: कोई टैक्स नहीं
₹4 से ₹8 लाख: 5%
₹8 से ₹12 लाख: 10%
₹12 से ₹16 लाख: 15%
₹16 से ₹20 लाख: 20%
₹20 से ₹24 लाख: 25%
₹24 लाख से अधिक: 30%
विशेषज्ञों के अनुसार, रिबेट और मानक कटौती के प्रभाव से कुछ परिस्थितियों में लगभग ₹12 लाख तक की आय पर प्रभावी टैक्स शून्य हो सकता है, जबकि वेतनभोगी वर्ग के लिए यह सीमा और अधिक हो सकती है।
3. वेतनभोगी वर्ग के लिए राहत वेतनभोगी करदाताओं के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किए जाने की चर्चा है, जिससे कुछ शहरों में कर लाभ बढ़ने की संभावना है। साथ ही मानक कटौती को जारी रखते हुए टैक्स गणना को सरल बनाए रखने पर जोर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, HRA क्लेम से जुड़े रिपोर्टिंग प्रावधानों को और सख्त किए जाने की दिशा में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कुछ मामलों में करदाताओं को मकान मालिक का PAN, किराया भुगतान का प्रमाण तथा यदि मकान मालिक रिश्तेदार हो तो उससे संबंधित जानकारी प्रदान करनी पड़ सकती है। ऐसे में बैंकिंग माध्यम से किराया भुगतान को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।
साथ ही, कुछ अतिरिक्त शहरों को उच्च HRA छूट श्रेणी में शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे वेतनभोगी वर्ग को अतिरिक्त कर राहत मिल सकती है।
4. AIS की जगह नया रिपोर्टिंग फॉर्मेट: वार्षिक सूचना विवरण (AIS) के स्थान पर एक नए रिपोर्टिंग प्रारूप (जैसे Form 168) लागू किए जाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिससे करदाताओं को अधिक व्यवस्थित और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो सके।
5. बिजनेस क्लास के लिए TDS और क्रेडिट में बदलाव : 1 अप्रैल 2026 से TDS प्रणाली को नए कानून के अनुरूप लागू किया जाएगा। साथ ही, पुराने कानून के अंतर्गत उपलब्ध MAT और AMT क्रेडिट को आगे कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति दी गई है, जिससे करदाताओं के पूर्व लाभ सुरक्षित रहेंगे।
6. फ़ास्ट डिस्क्लोज़र स्कीम: स्वैच्छिक खुलासे कवसर सरकार द्वारा 6 महीने की एक विशेष विंडो प्रदान की गई है, जिसके तहत विदेशी आय या संपत्ति का स्वैच्छिक खुलासा करने पर अपेक्षाकृत कम दंड का प्रावधान किया गया है।
7. डिजिटल एसेट (Crypto) पर बढ़ती निगरानी : नया कानून डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, जैसे क्रिप्टोकरेंसी, को अघोषित आय के दायरे में शामिल करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
8. फेसलेस आकलन प्रणाली अब पूरी तरह लागू : आयकर विभाग द्वारा फेसलेस आकलन प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया जा चुका है। अब अधिकांश कार्यवाही ऑनलाइन माध्यम से बिना व्यक्तिगत संपर्क के की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक सहज होगी।
हालांकि सरकार नई कर व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में पुराने कटौती और छूटों का विकल्प अभी भी उपलब्ध रह सकता है। इससे करदाताओं को अपनी आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प चुनने की सुविधा मिलती है।
आयकर अधिनियम, 2025 को देश की कर प्रणाली में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव न केवल कानून को सरल बनाएगा, बल्कि करदाताओं और सरकार के बीच पारदर्शिता और विश्वास को भी मजबूत करेगा।
करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी कर योजना समय रहते तैयार करें तथा आवश्यकतानुसार अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट / कर सलाहकार से परामर्श लेकर उचित निर्णय लें।

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