प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त एक विशेष समिति को 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वापस सौंप दी है, ताकि चंडीगढ़ स्थित पीएसीएल (पर्ल्स ग्रुप) द्वारा पोंजी घोटाले में ठगे गए निवेशकों को उनका बकाया वापस मिल सके। कथित धोखाधड़ी की अनुमानित राशि 48,000 करोड़ रुपये है। ईडी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की एक विशेष अदालत ने करीब 15,582 करोड़ रुपये के मौजूदा बाजार मूल्य वाली 455 अचल संपत्तियों को जस्टिस लोढ़ा समिति को वापस सौंपने का आदेश दिया है।
पीएमएलए के तहत, प्रभावित संस्थाओं या धोखाधड़ी के पीड़ितों जैसे ठगे गए बैंकों, जमाकर्ताओं और घर खरीदारों को उनकी संपत्तियों की वापसी या बहाली एक उपलब्ध उपाय है। जुलाई 2016 से चल रही ईडी की जांच पीएसीएल लि., उसके दिवंगत प्रमोटर निर्मल सिंह भंगू और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ 2014 में दर्ज किए गए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक मामले से जुड़ी है।
सीबीआई की एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दर्ज की गई थी। भंगू की मौत अगस्त 2024 में हुई। फरवरी 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने बाजार नियामक सेबी को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। इसकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा कर रहे थे, ताकि ऐसी संपत्तियों के परिसमापन और बहाली की देखरेख की जा सके।
इस जांच के तहत, ईडी ने 27,030 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। ये संपत्तियां पीएसीएल लि., इसके समूह/सहयोगी संस्थाओं और भंगू के परिवार के सदस्यों/सहयोगियों के नाम पर हैं। इनमें उनकी पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरिंदर कौर और सुखविंदर कौर तथा दामाद हरसतिंदर पाल सिंह हेयर और गुरप्रताप सिंह शामिल हैं।ईडी ने बताया कि विशेष पीएमएलए कोर्ट की ओर से 455 संपत्तियों की वापसी पीएसीएल योजना के तहत धोखाधड़ी का शिकार हुए लाखों निवेशकों को अपराध से अर्जित राशि की वसूली और वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ईडी के अनुसार, पीएसीएल से जुड़ी आरोपी संस्थाओं और व्यक्तियों ने अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई। इसके तहत उन्होंने कृषि भूमि की बिक्री और विकास की आड़ में पूरे देश में लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी कर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई।निवेशकों को नगद डाउन पेमेंट और किस्तों में भुगतान की योजनाओं के जरिये निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और उनसे गुमराह करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए। इनमें समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कानूनी कागजात शामिल थे। ईडी ने बताया कि ज्यादातर मामलों में जमीन कभी सौंपी ही नहीं गई और निवेशकों को करीब 48,000 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बकाया है। अब तक, इस मामले में ईडी पांच आरोपपत्र दायर कर चुका है।
लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक की 270 करोड़ की संपत्ति अटैचप्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र स्थित रियल एस्टेट कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक राजेंद्र लोढ़ा के खिलाफ धनशोधन की जांच के तहत 270 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की भूमि और अन्य अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया है। ईडी ने एक बयान में कहा, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 26 मार्च को इन संपत्तियों को अकुर्क करने का अंतरिम आदेश जारी किया गया था।इन संपत्तियों का मूल्य 271.48 करोड़ रुपये है। इसमें महाराष्ट्र के पनवेल और शाहपुर तालुकों में स्थित जमीन के टुकड़े भी शामिल हैं। यह कार्रवाई राजेंद्र लोढ़ा द्वारा बोर्ड की मंजूरी के बिना कंपनी की जमीनों को उनके कम मूल्य पर संबंधित व्यक्तियों/प्रॉक्सी कंपनियों को बेचने और अवैध रूप से धन का गबन करने के आरोपों से जुड़ी है।

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