'
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने नक्सलवाद पर केंद्र सरकार के प्रयासों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की आलोचना की और कहा कि इसका श्रेय गृह मंत्री को नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों को मिलना चाहिए। लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के प्रयासों पर चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में सत्ता में रही कांग्रेस सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान गठित एनएसी (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद) नक्सल समर्थकों से भरी हुई थी।
कांग्रेस सांसद ने लगाए आरोपइन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि अमित शाह के बयान में जरा भी सच्चाई नहीं है और उन्होंने एक गृह मंत्री के बजाय भाजपा नेता की तरह भाषण दिया। टैगोर ने शाह के दावों का खंडन करते हुए कांग्रेस का बचाव किया और कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में पार्टी ने अपने कई नेताओं का बलिदान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय सुरक्षा बलों को दिया जाना चाहिए, न कि गृह मंत्री को।
उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि गृह मंत्री अमित शाह अपने पद के अनुरूप बोलेंगे, लेकिन उन्होंने भाजपा नेता की तरह भाषण दिया। उनका भाषण पूरी तरह असफल रहा। वे केवल राजनीतिक आरोप लगा रहे थे, जिनमें कोई सच्चाई नहीं थी। कांग्रेस पार्टी ने नक्सली हमलों के खिलाफ लड़ाई में अपने कई नेताओं का बलिदान दिया है। हम मानते हैं कि इसका श्रेय सुरक्षा बलों को जाना चाहिए, न कि गृह मंत्री को, जो सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं।'
अमित शाह ने लोकसभा में कहा- देश में नक्सलवाद के दिन खत्मटैगोर की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई है, जिसमें अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा में शामिल लोगों के दिन अब खत्म हो चुके हैं और नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अमित शाह ने कहा, 'नक्सलवाद की जड़ में विकास की कमी नहीं, बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में तत्कालीन सत्ताधारी दल के नेता ने राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए स्वीकार किया था।
किसी दूसरे देश की विचारधारा से प्रेरित कम्युनिस्ट पार्टी भारत का भला कैसे कर सकती है? माओवादियों ने रेड कॉरिडोर को भेदभाव के विरोध के लिए नहीं, बल्कि इसलिए चुना क्योंकि वहां सरकार की पहुंच कमजोर थी।'उन्होंने आगे कहा, 'नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की बड़ी सफलता है। यह मोदी सरकार है, जो भी हथियार उठाएगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।' गृह मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें कई बार नक्सलियों और उनके समर्थकों के साथ देखा गया है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए बताया कि 4,839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 2,218 को जेल भेजा गया,
और 706 नक्सली, जिन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया, वे मुठभेड़ में मारे गए।उन्होंने कहा, 'हमने 31 मार्च तक क्षेत्र को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। पूरी प्रक्रिया के बाद मैं देश को इसकी जानकारी दूंगा। हालांकि, मैं पूरी तरह विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम नक्सल-मुक्त हो चुके हैं।' शाह ने आगे बताया कि 'बिहार 2024 से पहले ही नक्सल-मुक्त हो चुका था। महाराष्ट्र में एक तहसील को छोड़कर पूरा राज्य 2024 से पहले नक्सल-मुक्त हो गया था। ओडिशा और झारखंड भी लगभग पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो चुके हैं।'

Post a Comment