कॉपीराइट उल्लंघन के एक गंभीर मामले में कर्नावास पुलिस ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में गोयनका ऑयल इंडस्ट्रीज, खामगांव (महाराष्ट्र) की ओर से कानूनी मोर्चे का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता **यश अग्रवाल** की सक्रिय भूमिका सामने आई, जिनके मार्गदर्शन में अवैध री-पैकिंग और फर्जी ब्रांडिंग का पूरा नेटवर्क उजागर हो सका।
थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 जनवरी 2026 को गोयनका ऑयल इंडस्ट्रीज के मार्केटिंग मैनेजर एवं कंपनी के अधिवक्ता यश अग्रवाल तथा कंपनी प्रतिनिधि लविश द्वारा पुलिस को सूचना दी गई थी कि दामोदिया रोड स्थित एक गोदाम में कंपनी के रजिस्टर्ड कॉपीराइट का दुरुपयोग किया जा रहा है। सूचना के अनुसार, किसी अन्य कंपनी की खल को गोयनका ब्रांड की बोरियों में री-पैक कर बाजार में बेचा जा रहा था।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गोदाम पर दबिश दी। मौके पर गोदाम संचालक जीवन पिता दीपचंद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, निवासी सुल्तानिया, जो अपनी फर्म *जायसवाल ट्रेडर्स* के माध्यम से काम कर रहा था, को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी गोयनका कंपनी की ब्रांडेड बोरियों में माल भरकर मशीन से सिलाई कर रहा था।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह **स्वर्णा इंडस्ट्रीज** की खल को गोयनका ऑयल इंडस्ट्रीज की प्रसिद्ध ब्रांडेड बोरियों — *डबल मशाल* और *गौरक्षक भोग* — में भरकर, नकली होलोग्राम और टैग लगाकर किसानों एवं दुकानदारों को गुमराह कर रहा था, एवं गोयनका ऑयल इंडस्ट्रीज के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क एवं कॉपीराइट का अवैध उपयोग कर रहा था |
पुलिस ने गोदाम से गोयनका कंपनी के नाम से भरी हुई 22 री-पैक्ड बोरियां, 110 खाली प्रिंटेड बारदान, 6550 नकली होलोग्राम, लगभग 873 ब्रांड पर्चे, रैपर, टैग, एक इलेक्ट्रिक बोरी सिलाई मशीन तथा अन्य पैकेजिंग सामग्री जब्त की है।
मौके पर की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी कॉपीराइट का उल्लंघन कर अवैध री-पैकिंग एवं फर्जी ब्रांडिंग के माध्यम से अनुचित लाभ अर्जित कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध **कॉपीराइट अधिनियम, 1957** की धारा 51 एवं 63 तथा **भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)** की धारा 318(4), 347(1) एवं 349(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया।
इस प्रकरण में अधिवक्ता **यश अग्रवाल** द्वारा उपलब्ध कराए गए कानूनी मार्गदर्शन के चलते कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े अहम तथ्यों और धाराओं को मजबूती से सामने लाया जा सका, जिससे पुलिस को त्वरित और ठोस कार्रवाई करने में सफलता मिली।


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