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MP से महाराष्ट्र तक बिजली चोरी का खेल: अफसर–नेता गठजोड़ से करोड़ों का नुकसानThe Electricity Theft Racket from MP to Maharashtra: Nexus Between Officials and Politicians Causes Losses Worth Crores

 

लाइनमैन से लेकर बड़े अधिकारियों तक नेटवर्क, राजनीतिक संरक्षण में पनप रहा ‘करंट माफिया’

मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र तक बिजली चोरी अब सिर्फ छोटे स्तर का अपराध नहीं रहा, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। सूत्रों के अनुसार इस खेल में सिर्फ आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि अफसरों और कुछ नेताओं की मिलीभगत से बड़े स्तर पर बिजली की चोरी करवाई जा रही है।


जानकारी के मुताबिक कई इलाकों में ट्रांसफार्मर से सीधे अवैध कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती है, जिसका हिस्सा नीचे से ऊपर तक बंटता है। इस पूरे नेटवर्क में लाइनमैन, इंजीनियर और विभाग के अधिकारी तक शामिल बताए जा रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं से संरक्षण मिल रहा है। कई मामलों में शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि राजनीतिक दबाव और अंदरूनी सेटिंग के चलते फाइलें दबा दी जाती हैं।

कैसे चलता है खेल?

अवैध कनेक्शन देकर हर महीने तय वसूली

मीटर से छेड़छाड़ कर बिल कम दिखाना

छापेमारी की सूचना पहले ही लीक करना

बड़े उपभोक्ताओं को ‘VIP संरक्षण’

कितना नुकसान?

बिजली कंपनियों को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जिसका बोझ आखिरकार आम उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। ईमानदारी से बिल भरने वाले लोगों को महंगी बिजली का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

तेज सवाल:

क्या बिना अफसरों की मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव है?

क्या राजनीतिक संरक्षण के बिना यह नेटवर्क चल सकता है?

आखिर कब तक आम जनता इसकी कीमत चुकाती रहेगी?


जब सिस्टम ही ‘करंट’ से जुड़ जाए, तो चोरी पकड़ना नहीं, छिपाना आसान हो जाता है…

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