मध्यप्रदेश भाजपा का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों और आदर्शों से विमुखता का क्या कारण है?
लेखक - अमेय बजाज (एडवोकेट, म.प्र. उच्च न्यायालय)
भारतीय जनता पार्टी या यूं कहिए की मध्यप्रदेश की काँग्रेसमयी हुई भारतीय जनता पार्टी, एक व्यावसायिक नेता की बातों में आकर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अथक प्रयासों की मिट्टीपलित करने पर तुली हुई है; जिससे राष्ट्र का भविष्य और संप्रभुता खतरे में है। सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित के अथक प्रयासों से बने भारत के संविधान को अब बच्चों तक, मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा की कार्टून “एलिना” पहुंचाएगी।
14 अप्रैल 2026 को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा, नई दिल्ली में भारतीय संविधान की कार्टून बुक के 10 भाग प्रेषित करने जा रही है जिसका मुख्य किरदार एवं सूत्रधार एक छोटी बच्ची है - जिसका नाम एलिना है। भारतीय संविधान सभा की 15 महिलाओं में से किसी का भी नाम इस कार्टून बुक में मुख्य किरदार के रूप में उपयोग में लिया जा सकता था, परंतु वैचारिक नरेटिव स्थापित करने के लिए और हिंदू समाज के भविष्य को बौद्धिक रूप से अपाहिज बनाने के प्रयास से कार्टून का नाम “एलिना” रखा गया है।
जहां एक तरफ केरेला स्टोरी और कश्मीर फाइलस् जैसी तरह तरह की मूवी देश को जागृत करने का प्रयास करती हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने विभिन्न आयामों, मंचों, संस्थानों एवं कार्यक्रमों से भारत के हर नागरिक को यह समझाने के लिए तत्पर है की, वर्तमान में भारत एक इंटेलेक्चुअल वॉरफेयर की स्तिथि में है और हर रोज़, हर नागरिक, कैसे इसको रोक सकता है; वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा, अक्षय कांति बम के आर्थिक सहयोग को ऑबलाइज करने के लिए, भारत के बच्चों के भविष्य को “एलिना” के माध्यम से मलीन करने में प्रयासरत है ।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपनी पुस्तक “पाकिस्तान: थॉट्स ऑन पाकिस्तान” (1940) और अन्य लेखों में भारतीय मुसलमानों के बारे में चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने इस्लाम के भाईचारे को केवल मुसलमानों तक सीमित (यूनिवर्सल नहीं), हिंदुओं के प्रति शत्रुतापूर्ण, और भारतीय मुसलमानों की वफादारी को राष्ट्र के बजाय धर्म से जोड़कर देखा था। उन्होंने कहा था कि इस्लाम के तहत हिंदू “काफिर” हैं और उनके लिए वफादारी का दायरा केवल मुस्लिम समुदाय तक है। अगर हम अक्षय कांति बम की राजनैतिक प्रष्ठभूमि का विश्लेषण करेंगे तो लेशमात्र भी यह संदेह नहीं होगा की उक्त समस्त व्यावसायिक कार्यक्रम में दूर दूर तक राष्ट्रवादी सोच, राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्रनिर्माण की महक कहीं नहीं है, बल्कि इसके उलट इस “एलिना” परिप्रेक्ष्य से काँग्रेस की वह दुर्गंध आती है जिसने हमारे देश को अपनी राष्ट्रविरोधी कुंठित सोच के चलते अनगिनत बार हानी पहुंचाई है।
अक्षय कांति बम – एक व्यवसायी, शिक्षा संस्थानों से जुड़ा हुआ चेहरा। राजनीति में अनुभव? लगभग शून्य। लेकिन टिकट? सीधे लोकसभा का, काँग्रेस से। चुनाव के ठीक बीच में केस का “जागना”; राजनीति में इसे संयोग नहीं कहते। 2007 का एक पुराना ज़मीन विवाद, अचानक 2024 में अदालत ने उसमें धारा 307 (हत्या का प्रयास) जोड़ दी। 29 अप्रैल 2024 को सुबह तक कांग्रेस के उम्मीदवार, दोपहर तक नामांकन वापस, और शाम तक भाजपा में शामिल। चुनाव का खेल खत्म और उनके हटते ही, इंदौर सीट लगभग निर्विरोध हो गई और कांग्रेस बिना लड़े मैदान से बाहर। हाल ही में एम.बी.ए. पेपर लीक मामले में उनके संस्थान का नाम जुड़ा और विपक्ष ने गिरफ्तारी की मांग तक कर दी। अकस्मात प्रकट होकर, उतनी ही तेजी से पलट जाने वाले इस नेता की आर्थिक माया के चलते मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा ने अपने लोभ के लिए भारत की अखंडता और भविष्य को एक ऐसे अंधकार में ढकेलने का प्रयास किया है जो वर्तमान में तो भला प्रतीत होता है परंतु आने वाले समय में भारत के बच्चों और उनकी बुद्धिमत्ता को मकड़जाल की तरह सिकुड़ लेगा।
“एलिना” नाम पढ़ते ही इस शब्द का सरोकार मुस्लिम या ईसाई समाज से होना प्रतीत होता है। कुछ प्रश्न मेरे मन को झकझोर कर रख देते हैं –
1. क्या यह मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा का इस्लामी शब्दों एवं मुसलमानों के प्रति सहिष्णुता का सामान्यीकरण करना है?
2. या फिर सत्तारूढ़ि लोग यह चाहते हैं की, आज जन्मा बालक जब वर्ष 2047 में 21 वर्ष का होगा और बालपन से अपने देश का संविधान “एलिना” के माध्यम से याद रखेगा तब वोट उसी पार्टी को देगा जो “एलिना” से लगाव रखते हैं?
3. आप स्वयं विचार करें की क्या भारत की संविधान सभा में संविधान लिखते वक्त, सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित के प्रयास “एलिना” से कम थे, जो भारत के भविष्य का बच्चा “एलिना” के माध्यम से भारत के संविधान को याद रखे?
4. या फिर उन अंबेडकरवादी लोगों को भी मूर्ख बनाया और समझा जा रहा है जो आज भी अपने जीवन में अंबेडकर के विचारों को चरितार्थ करते हैं?
5. क्या मध्य प्रदेश की काँग्रेसमयी भाजपा एक ऐसे नेता जिसको नेतृत्व करते ही ना आता हो, उसके क्षणभंगुर आर्थिक सहयोग के आगे अपने मूल विचारों से डगमगा गई है ?
6. क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघर्षों, आदर्शों और विचारों को नज़रअंदाज कर अब भारतीय संविधान को “एलिना” के माध्यम से पढ़ना होगा?
7. क्या भविष्य में भारत के बच्चे “एलिना” और उसके धर्म को मानने वालों को सामान्य तौर पर अपना मित्र मानेंगे?
8. क्या सेकुलर आवरण में भारत के भविष्य को इतना पंगु कर दिया जाना चाहिए की हम हमारे क्रांतिकारियों को भूलकर “एलिना” को याद रखें?
प्रश्न और उनके उत्तर तो अनगिनत है लेकिन हमें यह समझना होगा की क्या हमारे परिवार, समाज और भारत का भविष्य ऐसे नेतृत्व के हाथों में सुरक्षित है जो “एलिना बम” को टाइम बॉम्ब की तरह उपयोग करते हुए भारत और हिंदुओं को नुकसान पहुंचाएंगे या फिर इस “एलिना बम” को वर्तमान में ही डिफ्यूज़ करके, हम भारत के निर्माण में जागरूक रहते हुए अपना योगदान दें एवं यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी समझें की हमारे सपनों का भारत सरोजिनी नायडू, सुचेता कृपलानी और विजयलक्ष्मी पंडित के नाम से जाना जाए।
अमेय बजाज (एडवोकेट, म.प्र. उच्च न्यायालय)
नोट – लेखक के द्वारा व्यक्त किए गए समस्त विचार उनके निजी विचारों की अभिव्यक्ति है एवं समाचार पत्र का आशय किसी की भावनाओं, जीवित या मृत व्यक्ति या संगठन को ठेस पहुंचाना नहीं है

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