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नगर निगम चुनावों के बीच शिवसेना (यूबीटी) का भाजपा पर तीखा हमला Amidst the municipal elections, Shiv Sena (UBT) launches a sharp attack on the BJP.


महाराष्ट्र की  29 नगर निगमों में चल रही चुनावी हलचल के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। ठाकरे खेमे ने भाजपा पर सत्ता में बने रहने के लिए अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने और अवसरवादी राजनीति अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने एआईएमआईएम और कांग्रेस के साथ स्थानीय स्तर पर सामने आए गठबंधनों को लेकर भाजपा की हालिया रणनीतियों को “पाखंड का शर्मनाक प्रदर्शन” करार दिया है।



शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय के जरिए भाजपा की नीतियों और राजनीतिक चालों पर सवाल खड़े किए हैं। संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा की मौजूदा मानसिकता किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने की है और विपक्ष में बैठने से बचने के लिए वह हर तरह के समझौते करने को तैयार है। ठाकरे गुट का आरोप है कि भाजपा के पास अब कोई ठोस वैचारिक आधार नहीं बचा है और उसका हिंदुत्व केवल स्वार्थी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दिखावा बनकर रह गया है। संपादकीय में यहां तक कहा गया कि सत्ता के बिना भाजपा का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है, यही कारण है कि वह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ भी हाथ मिलाने को तैयार दिखती है।

‘सामना’ के संपादकीय में व्यंग्यात्मक और तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा गया कि सत्ता के लिए भाजपा ने पहले “अजान” दी, फिर “निकाह” किया और यहां तक कि “खतना” भी करवा लिया, लेकिन काजी की दुआएं इतनी तेज रहीं कि यह गुप्त रिश्ता पूरी दुनिया के सामने आ गया। ठाकरे गुट ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विपक्ष के वोटों को बांटने के लिए एआईएमआईएम को अक्सर एक “छिपे हुए मददगार” के रूप में इस्तेमाल किया है।

शिवसेना (यूबीटी) ने नगर परिषदों में हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए भाजपा पर और गंभीर आरोप लगाए हैं। अकोट नगर परिषद में भाजपा पर एआईएमआईएम के साथ “खुली शादी” करने का आरोप लगाया गया है। वहीं अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा द्वारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को कमजोर करने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की बात कही गई है। सार्वजनिक आलोचना बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन गठबंधनों से दूरी बनाते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही, जिसे संपादकीय में “ट्रिपल तलाक” करार दिया गया। हालांकि ठाकरे गुट का कहना है कि भाजपा की साख को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई अब संभव नहीं है और महाराष्ट्र में उसकी स्थिति ऐसी हो गई है कि एक बार गई प्रतिष्ठा टंकी भर पानी से भी वापस नहीं लाई जा सकती।

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