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भर्ती की दौड़ में मौत पर क्या परिवार को मुआवजा मिलता है? नियम जानना जरूरी

 

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की भर्ती के फिजिकल टेस्ट में दौड़ के दौरान अभ्यर्थियों की मौत के मामलों ने मुआवजे को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान शिवम यादव की मौत का मामला सामने आया। मुरादाबाद में 4.8 किलोमीटर की दौड़ के दौरान वह अंतिम चरण में गिर पड़े। इसी तरह दिल्ली पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट में 23 वर्षीय सौरव कुमार की दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। 



सवाल यह है कि क्या भर्ती परीक्षा के दौरान मौत होने पर सरकार की ओर से अपने-आप मुआवजा मिलता है? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थी सरकारी कर्मचारी नहीं होता, इसलिए ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी की मृत्यु पर मिलने वाली नियमित अनुग्रह राशि के नियम सीधे उस पर लागू नहीं होते। भर्ती के विज्ञापन और संबंधित शर्तों में परीक्षा के दौरान होने वाली दुर्घटना या नुकसान की जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं। 


हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि परिवार को किसी भी स्थिति में आर्थिक सहायता नहीं मिल सकती। राज्य सरकार विशेष परिस्थिति में अलग से अनुग्रह राशि घोषित कर सकती है। इसके अलावा यदि जांच में आयोजन की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम या किसी अन्य पक्ष की लापरवाही सामने आती है तो कानूनी कार्रवाई और मुआवजे का दावा अलग प्रश्न बन सकता है।


दिल्ली पुलिस की भर्ती प्रक्रिया में PE&MT के दौरान रेस, मेडिकल व्यवस्था और अन्य प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। आधिकारिक भर्ती दस्तावेज में रेस के आयोजन और उम्मीदवारों की जांच की प्रक्रिया का उल्लेख है। 


इसलिए किसी मृत अभ्यर्थी के परिवार को मुआवजा स्वचालित कानूनी अधिकार मानने के बजाय संबंधित भर्ती विज्ञापन, राज्य सरकार की घोषणा, जांच रिपोर्ट और लागू कानून के आधार पर देखा जाएगा। यूपी होमगार्ड भर्ती के आधिकारिक बोर्ड ने भी सितंबर 2026 में PET से संबंधित अलग-अलग सूचनाएं जारी की हैं।

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