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नरसिंह बने प्रहलाद...

दीप भांड

शिशुपाल(सरकार) एक के बाद एक गलतियां करता जा रहा है और नारायण(जनता)गिनते जा रहे है...देखना है 100 गलतियां कब होती है और उसका परिणाम क्या होता है...




ये शहर सरकार की त्रुटियों,भ्रष्टाचार,लालच और उसके घमंड के कारण हुई कई मौतों पर भी चुप रहा,सोता रहा।

कई दशकों बाद इंदौर के लिए एक सुनहरा दिन आया है मुझे नहीं याद आता इंदौर ने पिछली बार कब किसी दंपति को शहरहित के लिए अनशन करते देखा हो।

एक गैरराजनैतिक(वर्तमान में) दंपत्ति ने निस्वार्थ भाव से ऐसी समस्या के लिए अनशन किया जिसे इंदौर के आम नागरिक ने अपने जीवन का भाग मान लिया था।वो इतना सहज हो गया था कि उसको अब इन अवैध बैनर पोस्टर्स से कोई समस्या नहीं होती थी किंतु पांडेय दंपत्ति ने सभी को बता दिया,जता दिया कि अब समय बदल रहा है।अब समय है इंदौर को जगाने का,वास्तव में स्मार्ट बनाने का।

क्या कोई हम गांव,देहात के वासी है या इंदौर कोई बाहुबलियों का शहर है जहां बैनर पोस्टर के लिए इतना हठ,इतना बवाल किया जाए।

ये IIT,IIM का शहर है,ये TCS,INFOSYS का शहर है,ये मेट्रो का शहर है,प्रदेश को आर्थिक गति देने का शहर है यहां पर किसी को इन विषयों के लिए अनशन पर बैठना पड़े कैसी विडंबना है ये।

बेहतर होता यदि कोई जनप्रतिनिधि स्वयं आगे आकर प्रण करता कि अब मेरे पोस्टर शहर में नहीं लगेंगे।इस प्रण से जितना विज्ञापन आपका इन पोस्टर्स से नहीं होता होगा उससे कई ज्यादा आप लोगो के दिल में जगह बना लेते किंतु क्या करे अभी सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा छाया हुआ है।

ऐसा क्या मांग लिया था प्रहलाद ने...? यही ना कि अवैध रूप से पूरे शहरभर में लगे बड़े बड़े पोस्टर्स हट जाए ऐसा क्या गलत मांग लिया,बात केवल पोस्टर की नहीं है आप बार बार गलतियां कर रहे है,आपकी पुरानी गलतियां अब उजागर होने लगी है,सबने बहुत सहन किया किंतु पांडेय दंपत्ति ने हिम्मत करी और बोल दिया और ये बोलने की हिम्मत भी आप ही ने उन्हें जेल में डाल कर दी है...बात पांडेय दंपत्ति की भी नहीं है वो नहीं होते तो कोई और होता पर यह होता जरूर...

ये क्या कर रहे है आप कैसी गवर्नेंस देना चाहते है।आप सरकार है एक सर्वे करा लीजिए शहर के कितने लोग आपके पोस्टर्स चाहते है यकीन मानिए 99.99% लोग नहीं चाहेंगे कि शहर में अवैध राजनैतिक पोस्टर्स लगाए जाए।एक आम नागरिक केवल आपके कार्य का मूल्यांकन करता है ना कि आपके चमकते चेहरे का...लगाइये आप जितने पोस्टर बैनर लगाना है पर शुल्क के साथ विज्ञापन के रूप में।

बात केवल बैनर पोस्टर की नहीं है, बात केवल बीजेपी की नहीं है। यह अनशन सभी राजनैतिक पार्टियों के विरोध में था और आप मान के चलिए यह एक चेतावनी थी अब इंदौर में ऐसी मूर्खता नहीं चलेगी।

बात केवल किसी एक विभाग या एक शहर की नहीं है अब तो वातावरण में ही जैसे भ्रष्टाचार घुल सा गया है। रोज़ अखबार खोलिये आपको कुछ ना कुछ बड़ा भ्रष्टाचार देखने को मिलेगा,रोज़ कुछ नया।

एक समय था जब रोज़ इंदौर और प्रदेश कुछ अच्छा करता था। नीत नए कीर्तिमान रचे जाते थे।अब रोज़ एक नया कांड सामने आता है।

पता नहीं हम कैसे दौर में आ गए है जहां या तो आप अंधभक्त होते है या अंधविरोधी होते है।नैतिकता की बात कोई नहीं करना चाहता।

जनता का दुर्भाग्य देखिए जनता ने जिन्हें चुना वो सत्ता पक्ष जनता की बात सुनने समझने को तैयार नहीं है और जिस विपक्ष का कर्तव्य है शहरहित में गंभीर विषयों को उठाना उनके बड़े राष्ट्रीय नेता इंदौर आते है। जब आमजन उनसे गंभीरता अपेक्षित कर रहा होता है तब वे फूहड़ कॉमेडी शो करके चले जाते है।आमजन जाए तो जाए कहां...?

माँ अहिल्या की पावन नगरी में दंपत्ति ने जनधर्म के लिए खुले आसमान में 8 दिन बिता दिए। जहां इस समय की गर्मी में 5 मिनट धूप उमस सहन नहीं हो रही उन्होंने 8 दिन हम लोगों के लिए बिताए और आश्चर्य देखिये सरकार को उनकी बात समझने में 8 दिन लग गए।

सच पूछा जाए तो एक आम इंदौरी होने के नाते हमसे भी चूंक हुई है जैसा समर्थन पांडेय दंपत्ति को हमे देना चाहिए था वैसा हम दे ना सके पर अब स्वयं से वादा करे यदि भविष्य कहीं कोई प्रहलाद आपके लिए होलिका में जले तो उसका साथ किसी ना किसी रूप में हम भी देंगे...


सभी इंदौरवासियों को पांडेय दंपत्ति को साधुवाद देना चाहिए,अभिनंदन करना चाहिए जो उन्होंने आमजन की बात सरकार के कानों तक पहुंचाई...ईश्वर से प्रार्थना है आपका ये अनशन जैसा निस्वार्थ दिख रहा है वास्तव में वैसा ही हो और हम सभी को सरकार से प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करे।

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