नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का नया अनुमान सामने आया है। एजेंसी के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत रह सकती है। यह अनुमान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों, पश्चिम एशिया में तनाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
आईसीआरए ने पहली तिमाही के लिए वास्तविक सकल मूल्य वर्धन की वृद्धि करीब 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि एजेंसी ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने विकास दर अनुमान को 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही थी।
क्षेत्रवार तस्वीर देखें तो औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत हैं। कृषि और सेवा क्षेत्र भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों के प्रदर्शन से भी कारोबारी गतिविधियों में मजबूती दिखाई दे रही है। आईसीआरए के अनुसार पहली तिमाही में 838 सूचीबद्ध कंपनियों के कुल राजस्व में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह बेफिक्र होने वाली नहीं है। आईसीआरए ने कमजोर मानसून और अल नीनो की आशंका को कृषि व ग्रामीण मांग के लिए जोखिम बताया है। पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतें भी निवेश तथा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं।
यानी फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत दिख रही है, लेकिन आने वाले महीनों में वैश्विक घटनाक्रम और मानसून विकास की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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