मुंबई। म्यूचुअल फंड उद्योग में नए खिलाड़ियों के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने पंजीकरण प्रक्रिया को आसान कर दिया है। सेबी ने 17 अगस्त 2026 को जारी परिपत्र के जरिए म्यूचुअल फंड पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग आवेदन प्रारूपों को एक संयुक्त आवेदन पत्र में बदल दिया है।
अब तक पंजीकरण प्रक्रिया दो चरणों में चलती थी। पहले प्रायोजक को म्यूचुअल फंड स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी लेनी होती थी और इसके बाद अंतिम पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। इसके लिए अलग-अलग आवेदन देने पड़ते थे। नई व्यवस्था में इन चरणों से संबंधित जानकारी को एक ही आवेदन में समाहित किया गया है।
सेबी का यह कदम कारोबार करने में आसानी और नियामकीय प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आवेदन एक हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पात्रता या जांच के नियम खत्म हो गए हैं। संभावित प्रायोजकों को अपनी वित्तीय क्षमता, स्वामित्व ढांचे, लाभकारी स्वामित्व, प्रबंधन, नियामकीय इतिहास और शासन व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब सेबी ने म्यूचुअल फंड के लिए वर्ष 2026 में नया नियामकीय ढांचा लागू किया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य नियमों को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सरल बनाना है।
जानकारों के मुताबिक, एकीकृत आवेदन से नए म्यूचुअल फंड स्थापित करने की प्रक्रिया में दोहराव कम होगा और आवेदकों के लिए अनुपालन का बोझ घट सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी से पहले सेबी की नियामकीय जांच और पात्रता संबंधी शर्तें लागू रहेंगी।

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