नई दिल्ली। अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी बड़े खर्च के समय निवेश का रिटर्न नहीं, बल्कि पैसा कितनी जल्दी हाथ में आएगा, यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में EPF, PPF, NPS और म्यूचुअल फंड की निकासी व्यवस्था एक जैसी नहीं है।
सबसे आसान और आमतौर पर तेज विकल्प—म्यूचुअल फंड। खुले हुए म्यूचुअल फंड में निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार यूनिट बेचकर पैसा निकाल सकता है। हालांकि रकम खाते में आने में योजना और भुगतान प्रक्रिया के अनुसार समय लग सकता है। कुछ योजनाओं में तय अवधि से पहले निकासी पर निकासी शुल्क भी लग सकता है।
EPF में भी जरूरत के समय अग्रिम निकासी का प्रावधान है, लेकिन यह हर परिस्थिति में मनमाने तरीके से पूरी रकम निकालने की सुविधा नहीं है। चिकित्सा, विवाह, शिक्षा, मकान और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति होती है। नौकरी समाप्त होने जैसी स्थितियों में पूर्ण निकासी के अलग नियम हैं।
NPS सबसे कम लचीला विकल्पों में शामिल है। इसमें आंशिक निकासी केवल निर्धारित परिस्थितियों में की जा सकती है। मौजूदा नियमों के अनुसार पात्रता पूरी होने पर अपने योगदान का अधिकतम 25 प्रतिशत तक आंशिक निकासी की जा सकती है और पूरी सदस्यता अवधि में इसकी संख्या सीमित है।
PPF को इमरजेंसी फंड मानना उचित नहीं है। यह लंबी अवधि की बचत योजना है और इसकी निकासी पर कड़े नियम लागू होते हैं। इसलिए अचानक जरूरत पड़ने पर PPF की तुलना में आसानी से उपलब्ध नकदी या उपयुक्त म्यूचुअल फंड अधिक उपयोगी हो सकता है।
सीधी बात: अगर सवाल सिर्फ यह है कि जरूरत पड़ने पर पैसा सबसे आसानी से कहां उपलब्ध हो सकता है, तो सामान्य तौर पर म्यूचुअल फंड सबसे अधिक लचीला, EPF उसके बाद और NPS-PPF अधिक प्रतिबंधित विकल्प हैं। हालांकि इमरजेंसी के लिए अलग से पर्याप्त नकद या बचत रखना ज्यादा सुरक्षित रणनीति है।

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