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बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, सरकार बनाएगी हाई लेवल कमिटी

 

नई दिल्ली। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के बीच केंद्र सरकार बैंकिंग क्षेत्र में व्यापक सुधारों की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ जल्द गठित की जाएगी। समिति का उद्देश्य देश की बैंकिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सुधारों की दिशा तय करना है।



सरकार का फोकस केवल बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। समिति वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और ग्राहक हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे की नीतियों पर सुझाव देगी। सरकार चाहती है कि बैंकिंग व्यवस्था आर्थिक विकास के अगले चरण में कारोबार, निवेश और रोजगार को ज्यादा प्रभावी ढंग से सहारा दे।


वित्त मंत्री के मुताबिक भारतीय बैंकिंग क्षेत्र इस समय मजबूत स्थिति में है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि उनका कुल कारोबार लगभग 283.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।


ऐसे में नई समिति के सामने सवाल सिर्फ मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने का नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बैंकिंग को ज्यादा सक्षम, तकनीक आधारित और ग्राहक-केंद्रित बनाने का भी होगा। कर्ज की उपलब्धता, डिजिटल बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, बैंकिंग संचालन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे मुद्दे सुधारों के महत्वपूर्ण हिस्से बन सकते हैं।


हालांकि सरकार ने अभी समिति की संरचना, सदस्यों और अंतिम सिफारिशों की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि आम ग्राहकों के लिए बैंकिंग के कौन-कौन से नियम सीधे बदलेंगे। फिलहाल इतना साफ है कि सरकार बैंकिंग क्षेत्र को विकसित भारत की आर्थिक रणनीति का अहम आधार मानकर बड़े सुधारों की तैयारी में है।

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