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गर्दन चटकाने की आदत क्यों होती है? जानिए कब यह नुकसानदायक बन सकती है

 

कई लोगों को गर्दन को बार-बार चटकाने की आदत होती है। कुछ लोगों को ऐसा करने के बाद हल्कापन या आराम महसूस होता है, इसलिए वे दिन में कई बार गर्दन घुमाकर चटकाने लगते हैं। लेकिन क्या यह आदत हमेशा सुरक्षित है?



गर्दन के जोड़ों में मौजूद द्रव के भीतर गैस के छोटे बुलबुले बन सकते हैं। गर्दन को एक खास तरीके से घुमाने या खींचने पर जोड़ों में दबाव बदलता है और इसी वजह से चटकने जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। कई बार यह सामान्य प्रक्रिया होती है और केवल आवाज आने का मतलब यह नहीं है कि हड्डी खराब हो रही है।


हालांकि, जानबूझकर गर्दन को जोर से या बार-बार चटकाना सही आदत नहीं मानी जाती। खासकर गर्दन को तेजी से मोड़ना या झटका देना मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है। बहुत ज्यादा दबाव से नसों या रक्त वाहिकाओं को चोट पहुंचने का जोखिम भी हो सकता है, हालांकि गंभीर समस्या होना दुर्लभ है।


अगर गर्दन चटकाने के साथ दर्द, सुन्नपन, हाथों में झनझनाहट, कमजोरी, चक्कर या सिरदर्द जैसी समस्या होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।


गर्दन में अकड़न रहती है तो बार-बार चटकाने के बजाय सही मुद्रा अपनाएं, लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से गर्दन की स्ट्रेचिंग करें। आराम पाने के लिए गर्दन को जोर से चटकाना समाधान नहीं है।

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