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जीएडी के डंडे से मैहर पहुंचे रोशन राय, इंदौर वापसी की उम्मीद बाकी

पत्नी की बीमारी बनी वापसी की उम्मीद, इंदौर कलेक्ट्रेट में अफसरों का टोटा



इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी का कलेक्ट्रेट इन दिनों अफसरों की कमी से जूझ रहा है और इसी बीच अपर कलेक्टर रोशन राय का मैहर तबादला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जून में तबादला आदेश जारी होने के बावजूद राय ने पत्नी की खराब तबीयत का हवाला देकर इंदौर में ही बने रहने का अनुरोध किया था। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने तक मामला लंबित रहने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने अब सख्ती दिखाई और राय को मैहर रवाना होना पड़ा।


मामले ने तब और जोर पकड़ा, जब 21 अगस्त को जारी 32 आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची में मैहर की अपर कलेक्टर संजना जैन को जल संसाधन विभाग में उप सचिव बना दिया गया। इसके बाद मैहर में अपर कलेक्टर का पद खाली हो गया।


सूत्रों के मुताबिक, जीएडी ने रोशन राय को मैहर में पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि पत्नी की बीमारी से जुड़े आवेदन पर परिस्थितियों को देखते हुए एक-दो महीने बाद पुनर्विचार हो सकता है। यानी मैहर का यह ‘वनवास’ लंबा चलेगा या नहीं, इस पर अभी पर्दा है।


पांच पद, काम सिर्फ दो के भरोसे


इंदौर कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर स्तर के स्वीकृत पदों की तुलना में मौजूदा उपलब्धता चिंता बढ़ा रही है। रोशन राय के रिलीव होने और निशा डामोर के लंबे चिकित्सा अवकाश के कारण काम का बड़ा हिस्सा नवजीवन विजय पवार और रिंकेश वैश्य के भरोसे आ गया है। जिला प्रशासन की आधिकारिक सूची में पवार और वैश्य के साथ राय तथा निशा डामोर को अपर कलेक्टर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।


इंदौर जैसे जिले में वीआईपी दौरे, कानून-व्यवस्था से जुड़े काम, राजस्व प्रकरण, प्रोटोकॉल और लगातार होने वाली प्रशासनिक बैठकों के बीच अधिकारियों की कमी सीधे कामकाज पर असर डाल सकती है।


कलेक्टर शिवम वर्मा के नेतृत्व वाले जिला प्रशासन में अब नजर सरकार की अगली पदस्थापना पर है।


सवाल यह है कि जब इंदौर जैसे महत्वपूर्ण जिले में अपर कलेक्टरों की कमी पहले से है, तो क्या सरकार समय रहते रिक्त पद भर पाएगी? और क्या रोशन राय का मैहर प्रवास वास्तव में सिर्फ दो महीने का होगा?

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