चंडीगढ़। पंजाब में पाकिस्तान से संचालित गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ी है। जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क को अपराध और आतंक के मिश्रित मॉडल के तौर पर देख रही हैं। हालिया कार्रवाई में देश के अलग-अलग हिस्सों में इस नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई व्यापक कार्रवाई में 14 राज्यों में 253 लोगों को पकड़ा गया और 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हुईं।
भट्टी का नाम मार्च 2025 में जालंधर में यूट्यूबर रोजर संधू के घर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में सामने आया था। पुलिस के मुताबिक घर पर फेंका गया संदिग्ध ग्रेनेड नहीं फटा था और भट्टी ने सोशल मीडिया पर हमले की जिम्मेदारी का दावा किया था। मामले में बाद की जांच में आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी भी हुई।
नवंबर 2025 में गुरदासपुर सिटी पुलिस थाने के बाहर हुए ग्रेनेड हमले की जांच ने भट्टी के नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े किए। दिल्ली पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में कुछ को सोशल मीडिया के जरिये जोड़ा गया था और उन्हें पाकिस्तान से निर्देश मिलने का आरोप है। जांच में रेकी और संभावित दूसरे हमलों की तैयारी की बात भी सामने आई।
सोशल मीडिया बना भर्ती का माध्यम
जांच एजेंसियों के अनुसार, भट्टी कथित तौर पर युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभावित करता था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन प्रोफाइल देखकर युवाओं को चिन्हित किया जाता था और पैसे तथा अपराध की दुनिया में पहचान का लालच देकर उन्हें नेटवर्क से जोड़ा जाता था। संचार के लिए डिजिटल और एन्क्रिप्टेड माध्यमों के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है।
स्थानीय नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती
इस मॉडल में हर व्यक्ति को पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं होती। जांच एजेंसियों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर अलग-अलग लोगों से अलग-अलग काम करवाने की रणनीति अपनाई जाती थी। इससे मुख्य संचालक तक पहुंचना और पूरे नेटवर्क की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाता है।
पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल एक आरोपी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि उस डिजिटल और स्थानीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की है, जिसके जरिए विदेश में बैठे संचालक स्थानीय अपराधियों और युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।
सवाल बड़ा है—क्या सोशल मीडिया पर कट्टरता, अपराध और विदेशी फंडिंग के इस गठजोड़ को शुरुआती स्तर पर रोकने के लिए मौजूदा निगरानी व्यवस्था पर्याप्त है?

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