Top News

100 करोड़ की कथित काली कमाई का हिसाब अब अदालत में! सौरभ शर्मा समेत 15 से ज्यादा पर चार्जशीट की तैयारी

 

प्रणव बजाज

भोपाल। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा से जुड़े करोड़ों रुपये की कथित अवैध संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी कर ली है। अब जांच का अगला बड़ा पड़ाव अदालत में आरोप-पत्र दाखिल करना है। रिपोर्टों के मुताबिक, सौरभ शर्मा के साथ उसकी पत्नी, मां, साले, करीबी सहयोगियों और कारोबारी साझेदारों समेत 15 से अधिक लोगों को आरोपी बनाए जाने की तैयारी है।



इनोवा से मिला सोना और नकदी बना सबसे बड़ा सुराग


19 दिसंबर 2024 को सामने आए इस मामले में भोपाल के मेंडोरी इलाके में खड़ी इनोवा से 11.60 करोड़ रुपये नकद और 51.893 किलो सोना बरामद हुआ था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार वाहन चेतन सिंह गौर के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन जांच में इसे सौरभ शर्मा के उपयोग से जोड़ा गया। अदालत के रिकॉर्ड में सोने का मूल्य करीब 40.27 करोड़ रुपये बताया गया है।


बाद की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस संपत्ति को सौरभ शर्मा से जोड़ने वाले तथ्यों का उल्लेख किया। इससे मामले में बेनामी संपत्ति, आय से अधिक संपत्ति और धनशोधन से जुड़े सवाल और गंभीर हुए।


100 करोड़ की संपत्ति का नेटवर्क


लोकायुक्त की जांच केवल नकदी और सोने तक सीमित नहीं रही। जांच में कथित तौर पर जमीन, व्यावसायिक निवेश, संपत्तियों और परिजनों तथा करीबियों के नाम पर किए गए लेन-देन की पड़ताल की गई। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी सौरभ शर्मा पर अपने नाम के अलावा परिवार के सदस्यों और दोस्तों के नाम पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप दर्ज हैं।


लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान सौरभ शर्मा के परिसर से नकदी, सोने के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की जब्ती भी दर्ज हुई थी। चेतन सिंह गौर के परिसर से भी नकदी और चांदी बरामद होने का उल्लेख हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में है।


पांच एजेंसियां, लेकिन सवाल अब भी कई


इस पूरे प्रकरण की जांच अलग-अलग स्तर पर लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों ने की। आयकर विभाग की कार्रवाई में मेंडोरी की इनोवा से मिली नकदी और सोने पर भी कार्रवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय ने लोकायुक्त की प्राथमिकी के आधार पर धनशोधन मामले की जांच की।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी कथित संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या था, धन का अंतिम लाभार्थी कौन था और किन लोगों ने इसे छिपाने में भूमिका निभाई?


सरकार की मंजूरी के बाद चार्जशीट


लोकायुक्त की विवेचना पूरी होने के बाद अब अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किए जाने की तैयारी है।


सौरभ शर्मा को अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से जमानत भी मिल चुकी है। अदालत के आदेश में ईडी की जांच और उसके स्तर पर दाखिल अभियोजन शिकायत की स्थिति का उल्लेख है।


अब असली परीक्षा अदालत में


लोकायुक्त की जांच पूरी होना इस मामले का अंत नहीं, बल्कि अदालती लड़ाई की शुरुआत है। 15 से अधिक संभावित आरोपियों पर लगाए जाने वाले आरोप, कथित बेनामी संपत्तियों का संबंध, सोने-नकदी का स्रोत और धन के वास्तविक लाभार्थियों से जुड़े साक्ष्य अब न्यायिक जांच की कसौटी पर होंगे।


बड़ा सवाल यही है—एक पूर्व आरक्षक की कथित संपत्ति का नेटवर्क आखिर कितना बड़ा था और इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था?

Post a Comment

Previous Post Next Post