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भारत में नहीं होगा तेल-गैस संकट? 41 देशों से तेल खरीद, भंडार बढ़ाने की तैयारी



पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने बढ़ाया आयात का दायरा, रणनीतिक तेल भंडारण भी होगा मजबूत

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री रास्तों पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति तेज कर दी है। सरकार ने राज्यसभा में बताया कि भारत अब 41 देशों से कच्चा तेल और 15 देशों से एलएनजी खरीद रहा है। पहले कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ता देशों की संख्या 27 और एलएनजी की छह थी।




तेल आपूर्ति को अलग-अलग देशों में बांटने का मकसद किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। इससे किसी एक समुद्री मार्ग या देश में संकट आने पर दूसरे स्रोतों से आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

भारत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी बढ़ा रहा है। मौजूदा तीन भंडारों की कुल क्षमता 53.3 लाख टन है। सरकार ने दूसरे चरण में अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना बनाई है, जिस पर करीब 14,527 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा ओएनजीसी ने मंगलुरु में 17.5 लाख टन का नया रणनीतिक तेल भंडार विकसित करने की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।

हालांकि चुनौती खत्म नहीं हुई है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए आयातित तेल पर निर्भर है। इसलिए सवाल यह है कि क्या 41 देशों से खरीद और बढ़ता भंडार भारत को लंबे अंतरराष्ट्रीय संकट में भी तेल-गैस की सुरक्षित आपूर्ति दिला पाएगा?

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