भोपाल/शिवपुरी। मध्य प्रदेश में तेंदुओं के कथित शिकार और वन्यजीव तस्करी की जांच अब दिल्ली स्थित वन्यजीव संरक्षण संस्था Wildlife SOS तक पहुंच गई है। 23 जुलाई को ग्वालियर-आगरा राजमार्ग पर चार आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान 10 तेंदुओं की खाल बरामद हुई थी। उस समय संस्था ने कार्रवाई को अपनी एंटी-पोचिंग इकाई की निगरानी का नतीजा बताया था। लेकिन खालों के मध्य प्रदेश के जंगलों से जुड़े होने की आशंका के बाद राज्य की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने अलग से जांच शुरू की।
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों भगवान सिंह उर्फ सलीम और वसीम के बारे में सामने आया कि वे Wildlife SOS से जुड़े हुए थे। जांच अधिकारियों का दावा है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संगठन के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर यह भी जांचा जा रहा है कि क्या कुछ वन्यजीव बरामदगी पहले से तैयार कर उन्हें एंटी-पोचिंग कार्रवाई के रूप में दिखाया गया था। हालांकि, ये आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जांच एजेंसी ने शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में तेंदुओं के अवशेष मिलने और कुछ फंदे बरामद होने की भी बात कही है। अवशेषों को डीएनए जांच के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया है। साथ ही वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के साथ समन्वय कर संभावित नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
STSF ने कार्तिक सत्यनारायण को आप शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने का नोटिस दिया है। अब जांच का केंद्र यह है कि 10 तेंदुओं की खाल कहां से आईं, शिकार का नेटवर्क कितना बड़ा है और आरोपियों तथा Wildlife SOS के बीच वास्तविक संबंध क्या था। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।

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