मुंबई। ने शेयर बाजार के निवेशकों और सूचीबद्ध कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए 1 अगस्त से 'ओपन मार्केट शेयर बायबैक' को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। पहले नियामक इसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की तैयारी में था, लेकिन कर (टैक्स) नियमों में हुए बदलाव के बाद अपने फैसले में संशोधन किया गया है।
ओपन मार्केट बायबैक वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई सूचीबद्ध कंपनी खुले बाजार से अपने ही शेयर वापस खरीदती है। इससे बाजार में उपलब्ध शेयरों की संख्या घटती है और कई मामलों में प्रति शेयर आय (EPS) तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से कंपनियों को पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
सेबी के इस फैसले के बाद निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिला है। बाजार जानकारों का कहना है कि मजबूत नकदी वाली कंपनियां अब फिर से ओपन मार्केट के जरिए बायबैक का विकल्प अपना सकेंगी। इससे शेयरधारकों को भी बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ सकती है और बाजार में निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा।
हालांकि, विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी कंपनी के बायबैक की घोषणा के आधार पर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न करें। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाएं और बाजार की परिस्थितियों का मूल्यांकन करना भी उतना ही जरूरी है। सेबी का यह फैसला पूंजी बाजार में पारदर्शिता और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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