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भारत-जापान की नई रणनीतिक जुगलबंदी

 


भारत और जापान ने अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और उन्नत तकनीक के क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।


बैठक में दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), साइबर सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लचीली वैश्विक सप्लाई चेन को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया। जापान ने भारत में निवेश, विनिर्माण और उच्च तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि भारत ने भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा को दोनों देशों की साझा प्राथमिकता बताया।

रक्षा क्षेत्र में सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उपकरणों और तकनीकी सहयोग को गति देने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर सहित हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन का संदेश दिया।

वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, चीन की बढ़ती आक्रामकता और संवेदनशील सप्लाई चेन पर निर्भरता को देखते हुए भारत और जापान अब आर्थिक सुरक्षा को अपनी रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख स्तंभ बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग न केवल दोनों देशों के आर्थिक हितों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सुरक्षित व्यापार व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

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