नई दिल्ली। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के नेतृत्व में भारत मुस्लिम देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती दे रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने में जुटे हैं, वहीं विदेश मंत्री जयशंकर पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए हैं। भारत की यह सक्रिय कूटनीति ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।
भारत ने हाल के वर्षों में इंडोनेशिया, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान सहित अनेक मुस्लिम देशों के साथ अपने संबंधों का उल्लेखनीय विस्तार किया है। ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, बंदरगाह विकास, रक्षा सहयोग और निवेश जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ा है। इससे भारत की आर्थिक और सामरिक स्थिति को भी मजबूती मिली है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए सभी प्रमुख देशों के साथ संवाद और सहयोग बनाए रखा है। यही कारण है कि भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति न केवल भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करती है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका को भी मजबूत बनाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, "एक्ट ईस्ट" और "पड़ोसी प्रथम" जैसी नीतियों के साथ खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया के मुस्लिम देशों से बढ़ती निकटता भारत को वैश्विक कूटनीति में अधिक प्रभावशाली और संतुलित शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

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