अहमदाबाद। वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में आज अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगा। इस मामले में निचली अदालत ने कई दोषियों को मौत की सजा और अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा, उसमें संशोधन होगा या कुछ दोषियों को राहत मिलेगी।
अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शहर के विभिन्न स्थानों पर हुए विस्फोटों में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों ने इसे देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में शामिल किया था और लंबे समय तक चली जांच के बाद कई आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया।
निचली अदालत ने वर्ष 2022 में सुनाए गए फैसले में अनेक आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा दी थी। इसके बाद दोषियों ने गुजरात उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। पिछले कई महीनों से इस मामले पर विस्तृत सुनवाई चल रही थी, जिसके बाद आज फैसला सुनाया जाना है।
देशभर की निगाहें अब उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न केवल दोषियों की सजा का भविष्य तय करेगा, बल्कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण और साक्ष्यों के मूल्यांकन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अदालत परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

Post a Comment