नई दिल्ली। ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा पीड़ितों को 21 करोड़ रुपये का मुआवजा देने संबंधी आदेश को बरकरार रखते हुए दिल्ली सरकार की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि दंगा पीड़ितों को समयबद्ध राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराना राज्य का दायित्व है और इस जिम्मेदारी से सरकार पीछे नहीं हट सकती।
दिल्ली सरकार ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि दंगों से हुए नुकसान की भरपाई सरकारी खजाने से करने के बजाय दोषी दंगाइयों से वसूली जानी चाहिए। सरकार का कहना था कि जिन लोगों ने हिंसा और संपत्ति का नुकसान किया है, आर्थिक जिम्मेदारी भी उन्हीं पर डाली जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि कानून के तहत दोषियों से क्षतिपूर्ति वसूलना संभव हो, तो सरकार बाद में वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर वह राशि उनसे वसूल सकती है, लेकिन इस आधार पर पीड़ितों के मुआवजे में देरी नहीं की जा सकती।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में अनेक लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में घरों, दुकानों तथा अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था। अदालत के इस फैसले के बाद प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, यदि सरकार इस आदेश को आगे चुनौती नहीं देती, तो उसे निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा।

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