नई दिल्ली। गर्मियों और उमस के मौसम में पसीना आना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कई लोगों के शरीर से आने वाली तेज दुर्गंध शर्मिंदगी का कारण बन जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पसीने में स्वयं कोई बदबू नहीं होती। असल समस्या तब शुरू होती है, जब त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया पसीने के संपर्क में आकर उसे तोड़ते हैं और दुर्गंध पैदा करने वाले तत्व बनाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि शरीर की साफ-सफाई में कमी, अधिक पसीना आना, तंग या सिंथेटिक कपड़े पहनना, मसालेदार भोजन, धूम्रपान, शराब का सेवन और हार्मोनल बदलाव भी शरीर की दुर्गंध बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा मानसिक तनाव और चिंता की स्थिति में निकलने वाला पसीना भी सामान्य पसीने की तुलना में अधिक दुर्गंध पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि नियमित स्नान, साफ कपड़े पहनने और डियोड्रेंट के उपयोग के बावजूद शरीर से लगातार तेज बदबू आती रहे, तो यह मधुमेह, थायरॉयड, लिवर या किडनी संबंधी बीमारी अथवा किसी संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि रोजाना स्नान करें, सूती कपड़े पहनें, शरीर को सूखा रखें, पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें। यदि शरीर की दुर्गंध लंबे समय तक बनी रहे या अचानक बहुत बढ़ जाए, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर होगा।

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