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हर दर्द की दवा नहीं होती गोली, सेल्फ मेडिकेशन बन सकता है जानलेवा

 


नई दिल्ली। सिरदर्द, बुखार, बदन दर्द या सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य समस्याओं में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना आज आम बात हो गई है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह आदत कई बार गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है। नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर चिकित्सकों ने लोगों से बिना परामर्श दवा लेने की प्रवृत्ति छोड़ने की अपील की है।


विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार दर्द निवारक, एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का स्वयं सेवन करने से दवाओं के दुष्प्रभाव, एलर्जी, किडनी और लिवर को नुकसान, यहां तक कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। कई बार दवा अस्थायी रूप से लक्षणों को दबा देती है, जबकि शरीर में मौजूद असली बीमारी लगातार बढ़ती रहती है।

डॉक्टरों का कहना है कि इंटरनेट, सोशल मीडिया या किसी परिचित की सलाह पर दवा लेना भी जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि हर मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी अलग होती है। सही जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही उचित दवा और उसकी सही मात्रा तय की जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए किसी भी बीमारी में स्वयं डॉक्टर बनने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना ही सुरक्षित और समझदारी भरा कदम है। समय पर सही उपचार न केवल बीमारी को बढ़ने से रोकता है, बल्कि अनावश्यक दवाओं और उनके दुष्प्रभावों से भी बचाता है।

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