फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ प्रोटीन का सेवन भी बढ़ा है, लेकिन इसके साथ कई गलतफहमियां भी लोगों के बीच फैल गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन स्वस्थ व्यक्ति की किडनी को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसलिए बिना वैज्ञानिक आधार के फैली अफवाहों पर भरोसा करने से बचना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार, प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों के निर्माण, ऊतकों की मरम्मत, हार्मोन और एंजाइम बनाने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वस्थ लोगों में संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेने से किडनी खराब होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि, जिन लोगों को पहले से क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) या गंभीर किडनी संबंधी बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही प्रोटीन की मात्रा तय करनी चाहिए।
एक आम मिथक यह भी है कि प्रोटीन सिर्फ जिम जाने वालों के लिए जरूरी होता है, जबकि सच्चाई यह है कि हर उम्र के व्यक्ति को शरीर की जरूरत के अनुसार प्रोटीन चाहिए। दालें, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, चिकन, सोया और विभिन्न प्रकार की फलियां इसके अच्छे स्रोत हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बिना जरूरत के अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से बचें। यदि सामान्य भोजन से पर्याप्त प्रोटीन मिल रहा है तो अतिरिक्त सप्लीमेंट आवश्यक नहीं होते। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी का सेवन स्वस्थ जीवनशैली का सबसे बेहतर आधार है।
डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल सलाह के बजाय पोषण संबंधी निर्णय हमेशा योग्य चिकित्सक या डाइटिशियन की सलाह से ही लेने चाहिए, ताकि लाभ के बजाय नुकसान की स्थिति पैदा न हो।

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