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पाकिस्तान से बातचीत पर RSS में अलग सुर? होसबोले के बयान पर भागवत ने दी सफाईRSS has a different tone on talks with Pakistan? Bhagwat clarifies Hosabale's statement



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के पाकिस्तान से संवाद बनाए रखने संबंधी बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। इस बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं, लेकिन पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर संवाद की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।


दरअसल, दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। उनका मानना है कि परिस्थितियों के अनुसार संवाद की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए, हालांकि आतंकवाद और सीमा पार से होने वाली गतिविधियां किसी भी बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा रहेंगी।


होसबाले के बयान के बाद इसे लेकर कई तरह की राजनीतिक व्याख्याएं सामने आने लगीं। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन भागवत ने संकेत दिया कि भारत की नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति और संवाद की इच्छा अपनी जगह है, लेकिन देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।


विशेषज्ञों का मानना है कि RSS नेतृत्व के इन बयानों को भारत की पारंपरिक नीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें एक ओर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और दूसरी ओर कूटनीतिक विकल्प खुले रखने की बात कही जाती रही है।


विपक्षी दलों ने भी इस बयान को लेकर सरकार और संघ के रुख पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि बातचीत और राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। उनका तर्क है कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई नरमी नहीं आई है।


पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर यह बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से औपचारिक वार्ता प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है और सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार तनाव का कारण बना हुआ है।

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