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इंदौर की बिजली व्यवस्था पर सवाल: क्या शहर को ‘अंधेर नगरी’ बनाने की तैयारी है?Question on Indore's power system: Is there a plan to turn the city into an 'Andher Nagari'?

 

बारिश अभी आई नहीं, बिजली व्यवस्था पहले ही हुई बेदम; घंटों कटौती से जनता त्रस्त

इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान रखने वाला इंदौर इन दिनों बदहाल बिजली व्यवस्था के कारण लोगों के गुस्से का सामना कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि बारिश का मौसम पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।


मंगलवार को देवगुराड़िया सहित कई क्षेत्रों में सुबह 9 बजे बिजली आपूर्ति बंद हुई और शाम करीब 6:30 बजे बहाल हो सकी। करीब साढ़े नौ घंटे तक बिजली नहीं रहने से हजारों परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि जिम्मेदार अधिकारियों और बिजली विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कई जगह फोन तक नहीं उठाए गए।

जनता पूछ रही— आखिर जवाबदेह कौन?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिजली कटौती की पूर्व सूचना नहीं दी जाती, शिकायतों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और अधिकारी मैदान में दिखाई नहीं देते। गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली बंद रहने से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

शहरवासियों का आरोप है कि बड़े नौकरशाह और जिम्मेदार अधिकारी केवल बैठकों और रिपोर्टों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत लगातार बिगड़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि मानसून से पहले ही यह स्थिति है तो भारी बारिश के दौरान हालात कितने खराब होंगे, इसकी कल्पना की जा सकती है।

‘स्मार्ट सिटी’ या ‘अंधेर नगरी’?

इंदौर को स्मार्ट सिटी और स्वच्छता में नंबर-1 शहर होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन बिजली व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल इस छवि को धूमिल कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि शहर में घंटों बिजली गुल रहे, शिकायतों पर सुनवाई न हो और जवाबदेही तय न हो तो फिर विकास के दावों का क्या अर्थ रह जाता है?

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

शहरवासियों ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि आम जनता को बार-बार बिजली संकट का सामना न करना पड़े।

सवाल जो जवाब मांग रहे हैं

शिकायतों के दौरान अधिकारियों के फोन क्यों नहीं उठे?

मानसून शुरू होने से पहले ही व्यवस्था चरमरा क्यों रही है?

जनता की परेशानी के लिए जिम्मेदार कौन है?

क्या स्मार्ट सिटी इंदौर को ‘अंधेर नगरी’ बनने से बचाने के लिए कोई ठोस योजना है?

इंदौर की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्बाध बिजली आपूर्ति और जवाबदेह प्रशासन चाहती है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

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