भोपाल। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में तबादला आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े एक मामले में तबादला आदेश में त्वरित संशोधन किए जाने के बाद कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों के मामलों में तत्काल कार्रवाई होती है, जबकि कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।
विवाद की जड़ में विभाग के दो प्रभारी मुख्य अभियंताओं— और —से जुड़ा तबादला प्रकरण है। बताया जा रहा है कि उच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद विभाग ने एक अधिकारी के तबादला आदेश में संशोधन कर दिया, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने इसे लेकर नाराजगी जताई है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभाग में हजारों कर्मचारी वर्षों से स्थानांतरण, पदोन्नति, वेतन विसंगति और पदस्थापना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई कर्मचारियों के आवेदन लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़ा होता है तो फैसले तेजी से लिए जाते हैं। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है
संगठनों ने आरोप लगाया कि विभाग में नियमों का समान रूप से पालन नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी के मामले में तत्काल संशोधन संभव है, तो कर्मचारियों की जायज मांगों के समाधान में भी उतनी ही तत्परता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पारदर्शी और समान तबादला नीति लागू करने की मांग की है।
वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संबंधित आदेश प्रशासनिक और कानूनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया गया है। हालांकि कर्मचारी संगठन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और मामले को लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने PWD में प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार के मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

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