नई दिल्ली।
मोटापे को आमतौर पर हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता वजन किडनी (गुर्दे) की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। लगातार बढ़ता मोटापा किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है और लंबे समय में किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
कैसे प्रभावित होती है किडनी?
विशेषज्ञों के अनुसार मोटापे के कारण शरीर को अधिक रक्त फ़िल्टर करने की आवश्यकता पड़ती है। इससे किडनी पर अतिरिक्त भार पड़ता है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता कम होने लगती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में हाइपरफिल्ट्रेशन कहा जाता है।
बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा
मोटापा अक्सर हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनता है। ये दोनों ही किडनी खराब होने के प्रमुख कारण माने जाते हैं। लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर और रक्तचाप किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
किडनी रोग का बढ़ सकता है जोखिम
अध्ययनों में पाया गया है कि मोटापे से पीड़ित लोगों में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। कई बार शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते।
किन संकेतों को न करें नजरअंदाज?
पैरों और टखनों में सूजन
बार-बार थकान महसूस होना
पेशाब में बदलाव
उच्च रक्तचाप
सांस फूलना
लगातार वजन बढ़ना
यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से परामर्श लेकर किडनी की जांच करानी चाहिए।
बचाव कैसे करें?
✔ वजन नियंत्रित रखें
✔ नियमित व्यायाम करें
✔ संतुलित और कम नमक वाला आहार लें
✔ ब्लड शुगर और बीपी की नियमित जांच कराएं
✔ पर्याप्त पानी पिएं
✔ धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें

Post a Comment