नई दिल्ली। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार रही Meenakshi Natarajan को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज किया जाता है, तो उसके लिए चुनावी कानून के तहत उपलब्ध उपायों का सहारा लेना होगा और चुनाव आयोग के समक्ष भी मामला उठाया जा सकता है।
मीनाक्षी नटराजन ने अपने राज्यसभा नामांकन को खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका तर्क था कि जिस मामले का हवाला देकर उनका नामांकन निरस्त किया गया, वह ऐसा आपराधिक मामला नहीं था जिसकी जानकारी नामांकन पत्र में देना कानूनी रूप से अनिवार्य हो। उनके वकील ने अदालत में कहा कि मामले में अभी संज्ञान तक नहीं लिया गया था और केवल नोटिस जारी हुआ था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में अदालत आमतौर पर सीधे हस्तक्षेप नहीं करती। न्यायालय ने कहा कि उम्मीदवारों के लिए चुनाव आयोग और चुनावी कानूनों में निर्धारित प्रक्रिया ही उपयुक्त रास्ता है।
गौरतलब है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन कथित रूप से एक लंबित मामले की जानकारी न देने के आरोप में खारिज किया गया था। कांग्रेस इस फैसले का लगातार विरोध कर रही है और चुनाव आयोग के समक्ष भी अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी है।
इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना और मजबूत हो गई है, जबकि कांग्रेस कानूनी और चुनावी दोनों मोर्चों पर लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है।

Post a Comment