सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद, प्रमोटी और डायरेक्ट IAS अधिकारियों के बीच बढ़ी नाराजगी की चर्चा
भोपाल। मध्यप्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों एक सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर चर्चा तेज है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी की एक टिप्पणी के बाद IAS अधिकारियों के बीच असंतोष और बहस का माहौल बन गया। मामला बढ़ता देख मुख्य सचिव अनुराग जैन को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने स्थिति को शांत करने की कोशिश की।
जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा जिले में एक प्रशासनिक पहल की सराहना को लेकर पूर्व केंद्रीय सचिव स्तर के अधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर कई अधिकारियों ने प्रतिक्रिया दी थी। इसी दौरान दीपाली रस्तोगी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किसी एक अधिकारी की नहीं बल्कि पूरी टीम की उपलब्धि है और जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। इसके बाद कुछ अधिकारियों ने इसे संबंधित IAS अधिकारी के योगदान को पर्याप्त महत्व न दिए जाने के रूप में देखा। स्क्रीनशॉट और टिप्पणियां विभिन्न प्रशासनिक समूहों में चर्चा का विषय बन गईं।
विवाद के बाद प्रमोटी और डायरेक्ट IAS अधिकारियों के बीच पुराने मुद्दों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। कुछ अधिकारियों ने इसे केवल एक टिप्पणी का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे प्रशासनिक संवेदनशीलता से जुड़ा विषय माना। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई अधिकारियों ने इस पर असहमति जताई और मामला वरिष्ठ स्तर तक पहुंच गया।
मुख्य सचिव ने किया हस्तक्षेप
सूत्रों के अनुसार विवाद बढ़ने और नौकरशाही में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्थिति पर नजर रखी। प्रशासनिक समन्वय और कार्यसंस्कृति को बनाए रखने के लिए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। अनुराग जैन पहले भी विभागों के बीच समन्वय और शिकायतों के समाधान पर जोर देते रहे हैं।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
मध्यप्रदेश की नौकरशाही में प्रमोटी और डायरेक्ट IAS अधिकारियों के बीच प्रतिनिधित्व, पदोन्नति और उपलब्धियों के श्रेय को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। हालांकि अधिकांश मामलों में वरिष्ठ स्तर पर संवाद के जरिए समाधान निकाल लिया जाता है।
फिलहाल नजरें आगे की स्थिति पर
प्रशासनिक गलियारों में अब यह चर्चा है कि क्या यह विवाद यहीं थमेगा या फिर सेवा संगठनों और अधिकारियों के बीच आगे भी इस पर विमर्श जारी रहेगा। हालांकि अभी तक किसी पक्ष की ओर से औपचारिक विवाद या शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश की नौकरशाही में आंतरिक संवाद और संवेदनशीलता के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

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