नई दिल्ली। बढ़ते साइबर अपराधों और तथाकथित "डिजिटल गिरफ्तारी" घोटालों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए ने मानवाधिकारों की सुरक्षा के विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। बैठक में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का उद्देश्य डिजिटल गिरफ्तारी जैसे साइबर धोखाधड़ी के मामलों से नागरिकों को होने वाले मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान पर चर्चा करना तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों की पहचान करना था। आयोग ने कहा कि ऐसे अपराध न केवल लोगों की वित्तीय सुरक्षा को प्रभावित करते हैं, बल्कि भय, तनाव और उत्पीड़न के माध्यम से उनके मौलिक अधिकारों पर भी प्रतिकूल असर डालते हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों में अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या ऑनलाइन माध्यम से डराते-धमकाते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे धन की ठगी करते हैं। वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं और तकनीकी जानकारी से कम परिचित लोग अक्सर ऐसे अपराधों का शिकार बनते हैं।
बैठक में जन-जागरूकता अभियान को मजबूत करने, साइबर अपराधों की त्वरित रिपोर्टिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
एनएचआरसी ने कहा कि डिजिटल युग में नागरिकों की गोपनीयता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयोग ने संबंधित संस्थाओं से आग्रह किया कि वे साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों के प्रति लोगों को लगातार जागरूक करें, ताकि मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों पर लोगों का विश्वास भी मजबूत बना रहे।

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